August 17, 2026

UP Election 2027: शामली सीट पर कांग्रेस की दावेदारी से बढ़ेगी अखिलेश यादव की मुश्किल? 2022 में कांग्रेस को मिले थे सिर्फ 780 वोट

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उत्तर प्रदेश की शामली विधानसभा सीट 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले ही सियासी चर्चा में है। शहरी और ग्रामीण आबादी के मिश्रण वाली यह सीट शामली जिले के साथ कैराना लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। इस सीट की विधानसभा संख्या 10 है। 2022 के चुनाव में समाजवादी पार्टी और राष्ट्रीय लोकदल के गठबंधन के तहत आरएलडी के प्रसन्न चौधरी ने यहां जीत दर्ज की थी।

हालांकि, 2027 के चुनाव को लेकर सीटों के समीकरण अभी से बदलते नजर आ रहे हैं। कांग्रेस अगर शामली विधानसभा सीट पर अपनी दावेदारी मजबूत करती है तो विपक्षी गठबंधन के भीतर सीट बंटवारे को लेकर सपा के सामने नई चुनौती खड़ी हो सकती है। खासकर तब, जब 2022 के चुनाव में कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद कमजोर रहा था।

शामली सीट का सियासी समीकरण

शामली को पश्चिमी उत्तर प्रदेश की महत्वपूर्ण सीटों में गिना जाता है। यहां जाट मतदाताओं की अच्छी संख्या है और गन्ना किसान चुनावी राजनीति में अहम भूमिका निभाते हैं। सपा और भाजपा दोनों का इस सीट पर मजबूत जनाधार माना जाता है। वहीं, आरएलडी के लिए शामली उसकी पश्चिमी यूपी की राजनीतिक विरासत से जुड़ी महत्वपूर्ण सीट है।

2022 के विधानसभा चुनाव में सपा और आरएलडी ने गठबंधन के तहत चुनाव लड़ा था। सीट आरएलडी के खाते में गई और प्रसन्न चौधरी ने भाजपा के तेजेंद्र सिंह को 7,107 वोटों से हराया। बसपा के बृजेंद्र और कांग्रेस के मोहम्मद अयूब जंग भी मैदान में थे।

2022 में किसे कितने वोट मिले?

शामली विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव परिणाम इस तरह रहे—

  • आरएलडी-सपा गठबंधन: 1,03,070 वोट
  • भाजपा: 95,963 वोट
  • बसपा: 8,183 वोट
  • NOTA: 799 वोट
  • कांग्रेस: 780 वोट

इन आंकड़ों से साफ है कि 2022 में कांग्रेस शामली सीट पर काफी पीछे रही। कांग्रेस प्रत्याशी को मिले 780 वोट NOTA से भी कम थे। वहीं आरएलडी-सपा गठबंधन को 48.86 फीसदी वोट मिले, जबकि भाजपा के खाते में 45.49 फीसदी वोट आए। दोनों के बीच वोट शेयर का अंतर करीब 3.37 फीसदी रहा।

2027 में सीट बंटवारा बनेगा बड़ा मुद्दा

2027 के विधानसभा चुनाव में शामली सीट का समीकरण इसलिए भी दिलचस्प होगा क्योंकि अब आरएलडी भाजपा के साथ गठबंधन में है। ऐसे में भाजपा और आरएलडी दोनों के सामने सीट बंटवारे का सवाल रहेगा।

आरएलडी के पास शामली में मौजूदा विधायक हैं, वहीं भाजपा की ओर से भी पूर्व विधायक की दावेदारी बताई जा रही है। ऐसे में यह देखना अहम होगा कि गठबंधन में शामली सीट आरएलडी के हिस्से में रहती है या भाजपा इसे अपने खाते में लेने की कोशिश करती है।

दूसरी ओर, अगर कांग्रेस विपक्षी गठबंधन में शामली सीट पर अपनी दावेदारी रखती है तो सपा के लिए भी समीकरण आसान नहीं होंगे। 2022 में कांग्रेस को महज 780 वोट मिले थे, लेकिन 2027 में सीट बंटवारे की बातचीत में पार्टी अपनी राजनीतिक स्थिति और संगठन के आधार पर दावा पेश कर सकती है।

शामली में घटे करीब 27 हजार मतदाता

2026 के एसआईआर के बाद शामली विधानसभा सीट पर कुल 2,84,524 मतदाता बताए गए हैं। 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान यह संख्या 3,11,974 थी। यानी करीब 27,450 मतदाताओं की संख्या कम हुई है।

ऐसे में मतदाता सूची में बदलाव के साथ-साथ 2027 में नए सियासी समीकरण भी शामली के चुनाव परिणाम पर असर डाल सकते हैं। फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि कांग्रेस की दावेदारी कितनी मजबूत होती है और भाजपा-आरएलडी गठबंधन में इस सीट का टिकट किसके हिस्से में जाता है।

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